अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. KYC क्या है?
KYC “नो योर कस्टमर” है और इसका मतलब है
(a) अकाउंट की सही पहचान और लाभकारी स्वामित्व का निर्धारण करने के लिए उचित प्रयास करना.
(b) पैसों का स्रोत जानने के लिए और
(c) कस्टमर के बिज़नेस को जानने के लिए
2 KYC में कौन सी महत्वपूर्ण प्रक्रिया शामिल है?
(a) कस्टमर स्वीकृति पॉलिसी
(b) कस्टमर पहचान प्रक्रिया
(c) ट्रांजैक्शन की निगरानी
(d) रिस्क मैनेजमेंट
3 कस्टमर कौन है?
एक कस्टमर को निम्नलिखित रूप में परिभाषित किया गया है
- एक व्यक्ति या संस्था जिसके पास अकाउंट है और/या बैंक के साथ बिज़नेस रिलेशनशिप रखता है
- जिसके स्थान पर अकाउंट व्यवस्थित किया जाता है (लाभकारी स्वामी)
- प्रोफेशनल मध्यवर्ती संस्थाएं जैसे स्टॉक ब्रोकर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, सॉलिसिटर आदि द्वारा किए गए ट्रांजैक्शन के लाभार्थियों को कानून के तहत अनुमति दी गई है.
- फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन से जुड़ा कोई भी व्यक्ति या संस्था जो बैंक के लिए महत्वपूर्ण रिस्क का कारण बन सकता है, जैसे एक वायर ट्रांसफर या सिंगल ट्रांजैक्शन के रूप में उच्च मूल्य की डिमांड ड्राफ्ट जारी करना.
4 कस्टमर पहचान प्रक्रिया क्या है?
इसका अर्थ है कस्टमर की पहचान करना और समुचित सावधानी बरतने के लिए वैधानिक आवश्यकताओं के अनुसार विश्वसनीय और स्वतंत्र डॉक्यूमेंट, डेटा और जानकारी के माध्यम से पहचान को सत्यापित करना.
5 “नॉन फेस टू फेस कस्टमर” के मामले में कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए?
प्रस्तुत सभी डॉक्यूमेंट के प्रमाणन पर ज़ोर दिया जा सकता है और अगर आवश्यक हो तो प्रमाणीकरण के लिए अतिरिक्त डॉक्यूमेंट की भी मांग की जा सकती है. पहला भुगतान KYC का अनुपालन करने वाले किसी अन्य बैंक के साथ उनके अकाउंट से किया जाना है. सीमा पार के ग्राहकों के मामले में, सर्टिफिकेट/परिचय तृतीय पक्ष से प्राप्त किया जाना है, जो एक रेगुलेटेड/सुपरवाइज्ड संस्था है और उसके पास पर्याप्त KYC सिस्टम है.
(नॉन फेस टू फेस कस्टमर वह होते हैं, जो ब्रांच में गए बिना कस्टमर बन जाते हैं)
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